और वो शाम यूँ ही गुज़रती रही…

Please follow and like us:
Facebook
Facebook
Instagram
Google+
https://shaiiljoharri.in/2018/12/%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a5%8b-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a5%9b%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%80/
LinkedIn
YouTube
Follow by Email
RSS

उदासियों की ज़मीं पर,
तन्हाइयों की गोद में,
मेरे दिल की धड़कन,
किलकारियां भरती रही,
फिर एक नई सुबह के इंतज़ार में,
फिर एक शाम, यूँ ही गुज़रती रही।

खुद को पाने की कोशिशें,
तो बहुत कीं हमने,
दिल को समझाने की कोशिशें
भी बहुत कीं हमने,
एहम के सामने वजूद मेरा
टिक ही न सका,
उसको हराने की कोशिशें
तो बहुत कीं हमने।
जीने की कशमकश में,
हर सांस मेरी मरती रही,
मगर उसको तो गुज़रना ही था,
और वो शाम यूँ ही गुज़रती रही।

आज सोंचा चलो उड़ चलें
कल्पनाओं की सेज पर,
शब्दों में बांधने को उन्हें,
उठाई कलम
और आ बैठे मेज़ पर,
सोंचा इन्ही कल्पनाओं को समेट कर,
पन्नों में क़ैद कर लेता हूँ,
ख़ुशी न सही,
ख़ुशी की परछाइयों को ही सहेज कर रख लेता हूँ,
उठा के कलम,
ज्यों ही कुछ लिखने बैठा,
कलम का साथ,
मेरी उंगलियों को मिला ही नहीं,
कुछ स्याह रंग छोड़ कर,
दम तोड़ दिया,
उसके आगे तो कलम चला ही नहीं,
कोरे कागज़ पे वो काली स्याही,
मेरी किस्मत की कालिख़ पे हंसती रही,
थोड़ा ठहर कर ही सही,
मगर वो शाम यूँ ही गुज़रती रही।।

शैल जौहरी “साहिल”

Please follow and like us:
Facebook
Facebook
Instagram
Google+
https://shaiiljoharri.in/2018/12/%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a5%8b-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a5%9b%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%80/
LinkedIn
YouTube
Follow by Email
RSS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enjoy this blog? Please spread the word :)

error: Content is protected !!