भूंख – अन्न का हर दाना ज़रूरी है…

घर से निकला मैं सुबह सुबह, भर पेट नाश्ता करके जी, इडली-डोसा और चाउमीन, दो प्लेट…

तेरी याद…

तेरी याद पलकें भिगोने लगी है, ये ग़म में मुझे अब डुबोने लगी है, बमुश्किल लबों…

ग़ज़ल – तुम्हारी पायलें ….

ग़ज़ल – तुम्हारी पायलें —- शिकायत है हमें इनसे, ये आठों याम करती हैं, तुम्हारी पायलें…

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