ग़ज़ल – तुम्हारी पायलें ….

Please follow and like us:
Facebook
Facebook
Instagram
Google+
https://shaiiljoharri.in/2019/01/%e0%a5%9a%e0%a5%9b%e0%a4%b2-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%82/
LinkedIn
YouTube
Follow by Email
RSS

ग़ज़ल – तुम्हारी पायलें —-

शिकायत है हमें इनसे, ये आठों याम करती हैं,
तुम्हारी पायलें हमको, यूँ ही बदनाम करती हैं,
संभाले कैसे दिल अपना, धड़क दीदार पर उठता,
तुम्हारी झलकियां रौशन हमारी शाम करती हैं।

चुरा लेती हैं हमको इक नज़र भर देखकर फिर क्यों,
तेरी नज़रें मेरी हर कोशिशें नाकाम करती हैं ?

मोहब्बत ये मेरी तुमको खुदाया हूबहू माने,
हमारी चाहतें खुद को तुम्हारे नाम करती हैं |

ये झुमके, हार और कंगना, अबस है यार हर गहना, (अबस – बेकार)
मोहब्बत ये मेरी तुमको, फ़ज़ल अंजाम करती है। (फ़ज़ल – श्रेष्ठता, गुण)

अदाओं को जरा अपनी सनम पर्दानशीं रखो,
बिखर कर संग जलवों के ये क़त्ल-ए-आम करती हैं।

नज़र से इश्क़ झलकाना, ज़ुबां से फिर मुकर जाना,
तुम्हारी साज़िशें दिलकश, अता अहज़ान करती हैं। (अहज़ान – दुख)

अजब है इश्क़ की दुनिया, ग़ज़ब है फ़लसफ़ा इसका,
जो बातें लब न कह पायें, नज़र इत्माम करती हैं। (इत्माम – सम्पूर्णता, प्रवीणता से)

अधूरे इश्क़ की हर दास्तां ‘साहिल’ सुख़नवर के,
लिखीं बेचैनियां जिनमें, बयां आराम करती हैं।

शैल जौहरी ‘साहिल’

Please follow and like us:
Facebook
Facebook
Instagram
Google+
https://shaiiljoharri.in/2019/01/%e0%a5%9a%e0%a5%9b%e0%a4%b2-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%82/
LinkedIn
YouTube
Follow by Email
RSS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enjoy this blog? Please spread the word :)

error: Content is protected !!